शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

गरीबों के विनाश पर, वाड्रा का विकास: अग्निवेश

वासिंद्र मिश्र.. स्वामी अग्निवेश अलग-अलग समय में अलग-अलग कारणों को लेकर चर्चित रहे हैं चाहे बंधुआ मुक्ति आंदोलन हो या इंडिया अगेंस्ट करप्शन हो या जो आदिवासी है गरीब तबके के लोग हैं उनके हक और हकूक दिलाना हो.. कई सारे मुद्दो को लेकर अग्निवेश जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में एक लंबा वक्त बिताया है... अग्निवेश जी सबसे पहले हम आपसे जानना चाहेंगे कि जो मुहिम आपने शुरू की थी गरीबों की जमीन आदिवासियों की ज़मीन भू माफिया के हाथ में न जाएं.. पिछले दस वर्षों में आपका क्या अनुभव रहा हैं......और कहां तक पहुंचा आपका ये आंदोलन?
स्वामी अग्निवेश- हम ने जब बंधुआ मुक्ति का आंदोलन शुरू किया.. 1980-81 में उससे पहले में शिक्षा मंत्री था हरियाणा सरकार में और मुझे खुद भी नहीं पता था की बंधुआ मजदूरी एक लानत हैं और इस प्रकार कानून भी बना हुआ है...1976 का कानून लेकिन जब मैं उस प्रसंग में जुडा और मैंने इस्तीफा देकर के मंत्री पद से सीधे पत्थर खदान मजदूरों में जाकर फरीदाबाद में काम करना शुरू किया तब मुझे पता चला कि ये जो आज हमारे देश में बंधुआ मजदूर हैं वो सौं दो सौं या दस बीस हजार नहीं है.. लाखों करोड़ो हैं और ये करोडों लोग कौन हैं जिनकी ज़मीने किसी और ने हथिया ली हैं जो परंपरागत तरीको से सैकड़ों साल से या हजारों साल से अपने जल जमीन जंगल पर बसे हुए थे और वहां से अपनी जीविका चलाते थे लेकिन जो षड़यंत्रकारी तरीके से विकास की अवधारणा बनती चली गई आजादी के बाद से खास कर के पिछले दस पंद्रह सालों में बीस सालों में मैंने यह महसूस किया की हमारा पूरा का पूरा ढ़ांचा जिसे विकास का नाम दिया जाता हैं वो गरीबों के विनाश पर खड़ा हैं। 

वासिंद्र मिश्र- हम इसी पर आएंगे आपसे बात करेंगे.. आप हरियाणा की बात कर रहे हैं. हरियाणा, छत्तीसगढ़, उड़िसा, राजस्थान इन राज्यों में पिछले दस वर्षो का अगर आकड़ उठाकर देखे तो जितनी सरकारी योजनाएं बनी है.. जल जंगल जमीन आदिवासी गरीब तबके के नाम पर उनकी भलाई के नाम पर उसका अगर सर्वाधिक फायदा उसे मिला .. जो की पांच सतारा होटलों में बठता हैं जो माफ़िया हैं जिनकी साठगाठ है सरकार में ऊंचे पदो पर बैठे हुए लोगों से और इसमें अभी जो हाल में चर्च एक बार फिर शुरू हुई हैं... रॉबर्ट वाड्रा कि उनको लेकर भी आपने एक याचिका दाखिल कर रखी है.....उस याचिका में आपने क्या तथ्य लगाए हैं सुप्रीम कोर्ट के सामने और आज उस याचिका का क्या स्टेटस है?
गरीबों के विनाश पर, वाड्रा का विकास: अग्निवेश

अग्निवेश जी- देखिए रॉबर्ट वाड्रा क्योंकि एक ऐसे परिवार से संबंधित हैं जिसको देश का प्रथम परिवार कहा जाएगा.. सत्ता की दृष्टि से उसको फायदा पहुंचवाना उसके लिए हमारे देश का जो सबसे बड़ा बिल्डर जिसको मैं बिलडर माफिया भी कह सकता हूं DLF उसको आगे किया उसने जा करके रॉबर्ट वाडरा को बहुत गलत तरीके से फायदा पहुंचाया... कुछ लाख रूपये पहले तो अपने एकाउंट से वो दिया उधार उससे उनको जमीन खरीद कर दी वो जमीन खरीदी हुई को फिर खुद खरीद लिया DLF ने कई गुना ज्यादा दामों पर तो इस तरीके से आपस की जैसे मिलीभगत से वो लखपति से करोड़पति से अरबपति बनते चले गए और देखते देखते कुछ चंद महिनों में ही वो 300-350 करोड़ रुपये के मालिक बन गए रॉबर्ट वाड्रा जी अब उनके ऊपर तो कोई हाथ ड़ाल नहीं सकता ये जनता है DLF बड़ी आसानी से ..अब DLF से कोई चैरिटी के लिए तो कह नहीं रहा था ..ये न कोई रॉबर्ट वाड्रा की गरीबी को देखकर दिल पसीज़ गया और उसको कहा कि लो ये लेलो .. ऐसा नहीं था उसको अपना ऊल्लू सीधा कराना था तो हरियाणा सरकार ने कहा कि भई ये काम तो तुम्हारा मैंने ही कर दिया ..इस प्रथम परिवार में मैंने अपनी घुसपैठ ऐसी जमा ली अब तुम जो भी कुछ करोगें उसकी भी कोई जांच नहीं हो पाएंगी...अब मेरा फायदा करो हरियाणा सरकार चाहती थी हमारे भूपेंद्र सिंह हुड्डा जी की सरकार कि हमे DLF को बहुत बड़ा कुछ देना हैं तो ये गुड़गांव का एक वजीराबाद एक गांव हैं वहां सैकड़ो एकड़ जमीन गांव जहां पर जंगल लगे हुए ग्रीन हैं जो फॉरेस्ट के अंतर्गत आता हैं तो उसको उन्होंने कहा कि ये तुम को दे देते हैं उसके लिए तिकडम बाजी की दो तरीके के पहले विज्ञापन किए पहले को रिजेक्ट किए दूसरे विज्ञापन में कहा कि हम खुद परमीशन लेकर देंगे सरकार से जो ग्रीन ट्रिब्युनल ..ये उसके साथ जो होता हैं Ministry of Enviorment वगैरह से अब Ministry of Enviorment से न लेकर के उन्होंने एक और तीसरा रास्ता निकाला।

वासिंद्र मिश्र- स्वामी जी ये जो कहानी आप बता रहें हैं ये कोई नई नहीं हैं पिछले दो तीन वर्षों से लगातार किश्तो में देश के अखबारों में T.V चैनलों में अलग-अलग रुप में देखने को मिली हैं पढ़ने को मिली हैं आपको नहीं लगता की इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष सब शामिल हैं इस तरह के साठगांठ को एक्सपोज़ करने में इस तरह के जो साठ गांठ में शामिल लोग हैं उनके विरुद्ध कार्यवाही कराने में किसी की कोई दिलचस्पी नहीं हैं चाहे वो सत्ता पक्ष हो या विपक्ष हो?
अग्निवेश जी- नहीं एक्सपोज करने में तो मुझे नहीं लगता कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की कोई ख़ास दिलचस्पी हैं....क्योंकि दोनो इसमें पूरी साठ-गाठ जो आप कह रहें हैं उस तरह बना हुआ हैं क्योंकि वो कहते हैं हम तुम्हारा न करे एक्सपोज हम तुम्हारा न करें इस तरह से मिल बांट करके खाते रहें लेकिन जब एक्सपोज हो गया तो इसके अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं था कि हम सुप्रीम कोर्ट मे जाएं सुप्रीम कोर्ट के द्वारा नियुक्त C.E.C Centraly Empowerd जो कमेटी हैं उस व्यक्ति को इस्तमाल करने के लिए हरियाणा सरकार ने क्या किया कि वो उन्होंने उसमें याचिका ड़ाली अपनी और वो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपने C.E.C से कि भी देखों ये ज़मीन कैसी हैं देखकर के बताओं तो वो उस ज़मीन को जो forest हैं उसे गैंर Forest Area या इस तरीके से इसको यहां से हटाकर के Compensatory foresting कर सकते हैं यानी सरकार और ये माफिया गठजोड का सबसे नापाक गठजो़ड जिसको कह सकते हैं कि आपने सुप्रीम कोर्ट को आप ने एक अंधेरे में रखा सुप्रीम कोर्ट के सबसे विश्वसत व्यक्ति जिसके ऊपर जज आंख मुंद कर विश्वास करते हैं आपने उसको मैनीपुलेट किया अपने फेवर में।

वासिंद्र मिश्र- इसमें एक घटना याद आ रहीं हैं इंदरा गांधी का जमाना था जब और संजय गांधी राजनीति में उनका वर्चस्व बढ़ रहा था धीरे-धीरे खास तौर से दखद आंदाजी बढ़ रहीं थी शासन के काम काज में तो उस जमाने में भी तमाम मुख्यमंत्रियों ने संजय गांधी को खुश करने के लिए या इंदरा जी को खुश करने के लिए तमाम ऐसी योजनाएं शुरू कर दी थी अपने अपने राज्यों में जिससे की जनता का तो भला नहीं हो रहा था लेकिन संजय गांधी और उनसे जुड़े हुए लोगो का भला हो रहा था उस समय भी आपका हरियाणा जो आगे था और इस समय भी जो घटनाएं देखने को मिल रहीं हैं आपका हरियाणा राजस्थान ये जो राज्यों के मुख्यमंत्री रहे हैं पिछले कुछ वर्षो में इन्होंने बहुत ही Calculated तरीकों से चाहें land law change करने का मामला हो या land aquisition का मामला हो या land aquisition act बनाने का मामला हो उसी तरीके के कानून बनाए गए जिससे रॉबर्ट वाड़रा को फायदा पहुंचे अब आपको नहीं लग रहा हैं जब यह कानून बन रहा था उस समय उस समय विपक्ष क्यों चुप ता उस समय सरकार की बाकी Agencies क्यों चुप थी और अब जब चुनाव का time हैं तो फिर एक बार इसे मुद्दा बनाया जा रहा हैं?
अग्निवेश जी- नहीं आपका कहना ठीक हैं ये इमानदारी से मुद्दा बना करके उसे अंतिम निष्कर्श तक नहीं ले जाएंगे ये उछाल उछाल करके बीच में से उसका छोटा सा दोहन कर लेंगे उसमें से राजनीतिक लाभ लेंगे लेकिन यदि विपक्ष के लोग भी ईमानदार हो तो ये बहुत सी चीज़े निकलेंगी इसके अंदर तो ये जो हैं थोड़ा या उछाल देना फिर पीछे हठ जाना ये इस तरह की रणनीति हैं मैं समझता हूं ये बहुत गंदा कर रहा हैं... विश्वसनीयता खत्म हो रहीं हैं.. यानी किसी के ऊपर आरोप लगाएगें भी और फिर पीछे हठ जाएंगे काले धन के बारें में भी ये करेंगे ज़मीन के सौदेबाजी के बारे में ये करेंगे और जैसे राजस्थान में भी वो जिस समय आशोक गहलोत जी मुख्यमंत्री थे उस समय भी रॉबर्ट वाड्रा को काफी कुछ ज़मीने वहां दी गई तो ये जो सारा का सारा एक बार उछालना और फिर चुप हो जाना तो ये जो हैं एक ब्लैक मेलिंग का तरीका है।

वासिंद्र मिश्र- क्या तरीका हैं इस तरह के लोगो से निपटने का लड़ने का इस तरह के जो असमाजिक तत्व है उनसे निज़ात पाने का या जनता को निज़ात दिलाने का आपकी नजर में क्या माकूल तरिका हैं?
अग्निवेश जी- देखिए माकूल तरिका तो यही था भ्रष्टाचार के खिलाफ जैसे हम लोगो ने लड़ाई शुरू की थी इंडिया अगेंस्ट करप्शन के नाम से और हमें उम्मीद थी की ये बहुत दूर तक जाएगा केवल ये जनलोकतंत्र के सवाल तक ही समित नहीं रहेगा लेकिन हर तरीके हर तरीके के भ्रष्टाचार को उठाते उठाते देश को एक ईमानदार समाज की तरफ ले जाएगा वो था हमारा वो तरीका अब वो बीच में ही जैसे भ्रूण हत्या हो गई।

वासिंद्र मिश्र- ब्रेक के बाद आपका स्वागत हैं स्वामी जी हम चर्चा कर रहे थे कि भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए एक मुहिम शुरू हुई थी उस मुहिम के शुरूआती दौर में आप भी थे अन्ना हजारे थे और भी तमाम लोग थे लेकिन ज्यों ज्यों मुहिम आगे बढ़ी फिर उसमे कलब शुरु हो गई ..जिसका नतीज़ा यह हुआ के आपने कुछ दिन बाद ही उस मुहिम से अपने को अलग कर लिया उसके बाद जो धीरे-धीरे आज जो उस मुहिम का हश्र हुआ वो देश की जनता के सामने है इस नाकामी के लिए आप किसको सीधे तौर पर जिम्मेदार मानते हैं?
अग्निवेश जी- देखिए जब ये आंदोलन शुरू हुआ था ये हमारा दफ्तर हैं 7 जंतर मंतर रोड पर यहीं पर सारी मंत्रणाए सारे विचार चलते थे अरविंद केजरीवाल जी, मनीष सिसौदिया जी, किरण बेदी जी आयी फिर चर्चित संतोष हेगड़े और तमाम हम लोग जुड़ते जुड़त प्रशांत भूषण जी उनके पिता श्री सब लोग कहने का मतलब जब ये आंदोलन शुरू हुआ था इसमें सहयोग बड़े जोर शोर से मिला बाबा रामदेव जी का श्री श्री रविशंकर जी का आर विशंसकंसरा़व का सब लोगो को लगा कि यह बहुत तेज बड़ी मुहिम बन सकती हैं और सब लोग काफी ईमानदारी से साथ जुड के काम करना चाहते थे अब जैसे जैसे आंदोलन सचमुच में व्यापक बनता चला गया तो उससे कुछ निकालने का विचार यदि किसी के मन में बना तो वो महत्वकांक्षा जगी अरविंद केजरीवाल के मन में और उन्होंने उस समय अन्ना हजारे को अपने पूरी पकड़ में रखकर के उन्होंने कोशिश की अब मैं किसी तरिके से ये शहिद हो जाए इस आंदोलन में तो मैं सिधे इनका उत्तराधिकारी बनकर के आगे जो मैं आगे चलाऊ उसको अन्ना हजारे को खुद भी जब समझ में आयी तब उन्होंने अपनी जान बचाई विलास रॉव देशमुख के घर पर अपने लोगो को भेजा रालेगण गांव सिद्धि के जो कार्यकर्ता थे और उन्होंने आकर के फिर एक चीट्ठी वीट्ठी का बीच बचाव करके अन्ना जी के अनशन तुड़वा दिया।

वासिंद्र मिश्र- ओ सही है.. वो तो देश की जनता ने देखा था जब राम लीला ग्राउंड में जिस तरिके से उसका खात्मा हुआ आंदोलन का मैं यह जानना चाह रहा हूं आपको नहीं लगता कि जो भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर जो मुहिम शुरू हुई थी उस मुहिम में जो लोग शामिल थे वो खुद भ्रष्टाचार मे लिप्त हो गए उसी तरह की चंदा उगाही उसी तरह की डोनेशन उसी तरह की फंडिंग वे भी लेने लगे जिस तरह कि फंडिंग और डोनेशन लेकर बाकी पार्टियां भ्रष्टाचार को परवान पर चढ़ाई हुई हैं?
अग्निवेश जी- अब ये तो कोई जांच होगी तो पता लगेगा ज्यादा अच्छी तरह से अभी तो। 

वासिंद्र मिश्र- नहीं आपने भी तो ज़िक्र किया था जब फंडिंग की बात आयी थी इंडिया अंगेस्ट करप्शन का दुरुपयोग हो रहा है?
अग्निवेश जी- मैंने कहा था कि जो 5 करोड़ रुपये भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के पैसे थे उस अकाउंट को कंट्रोल कर रहे थे मनीष सिसौदियां और अरविंद केजरीवाल पब्लिक रिसर्च फाउंडेशन के नाम से अकाउंट खोला हुआ था हम जैसे जो लोग काम कर रहे थे हमे भी पता नहीं था की सारा पैसा जो जनता एक भावुकता और उसके साथ समर्पण भाव से दे रही हैं वो जा कहा रहा हैं तो पांच करोड़ रुपये से भी ज्यादा रुपया था जो बाद में वो आंदोलन को दरकिनार कर के और पार्टी बना ली गई आम आदमी पार्टी तो गया कहा वो पैसा तो उस समय पूरा यह संदेह हुआ की सारा का सारा पैसा उसी account में उन्ही लोगो के द्वारा अपनी पार्टी को आगे चमकाने के लिए इस्तमाल किया गया।

वासिंद्र मिश्र- तो मानें कि आंदोलन में जो बिखराव आया जो भटकाव आया उसका एक प्रमुख कारण यही वहीं था चंदा था जिसको लेकर बंदर बाट शुरू हुई एक तो पॉलिटिकल माइलेज लेने की मंशा थी दुसरा आर्थिक मंशा धन जुटाने की?
अग्निवेश जी- नहीं आर्थिक जुटाने का जो लोग स्वता स्फूर्त भी दे रहे थे तो बड़ा लोगो में जो जोश पैदा हुआ ये तो अच्छा बात थी लेकिन वो जो जनशक्ति थी उसमें से जो धन शक्ति निकल कर आई तो उसके ऊपर एकाधिकार करना और फिर उसमे से आपकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए तो में क्या बताऊ देश की राजनीति में जो प्रयोग हुए इस तरह का जो प्रयोग हुआ उससे काफी कुछ लोगो में एक उम्मीद की किरण जगी भी फिर उनमें निराशा भी हो रही हैं तो ये दोनो तरह की बाते धाराएं चल रही हैं।

वासिंद्र मिश्र- स्वामी जी इस बार के चुनाव में एक बड़ा मुद्दा है प्राकृतिक संसाधनों की लूट चाहे कोयला हो स्पेक्ट्रम की लूट हो 2G हो ये जितने बड़े बड़े घोटालो की चर्चा हो रही हैं पिछले लगभग दो वर्षो से चुनाव के दौरान भी हो रहीं हैं. इसमें आप किसको खास तौर पर जिम्मेदार मानते है..क्या इसमें सरकार ही जिम्मेदार हैं या राजनीतिक दल जिम्मेदार है या सिस्टम जिम्मेदार हैं या सब मिल जुल के इस लूट में शामिल हैं?
अग्निवेश जी- देखिए ये लूट केवल भारत में नहीं हो रहीं है पूरे आप मध्य अफ्रिका के तमाम नाईजीरिया से लकर के फांगो का उनका देखे और भी लेटिन अमेरिका के देशो का देखे तो पूरी दुनिया के अंदर बड़े बड़े जो कॉरपोरेट्स हैं.... और उन्होंने जो विकास का मॉडल बनाया हैं वो इस खनिज संपदा के दोहन पर इनकी लूट पर खड़ा हुआ है...और वो भारत में पूरी ताकत इस लिए लगाए हुए है.. कि जिसको हम रेड कॉरिडोर कहते हैं जो आदिवासी बहुल ईलाका हैं..वही पर हमारे देश की सारी संपदा केंद्रित हैं अब यदी वहां पर उस खनिज संपदा को निकाल कर के कॉरपोरेट्स के हवाले करना और उसमें से GDP को 7% से 9% पहुंचाना तो ये यदि एक लक्ष्य है हमारी सरकारो को तो बाकी कानूनो को घटा बढा करके और कानून कानून को नहीं उन आदिवासियों को जो सदियों से वहां बसे पड़े हैं वे गरीब है बेशक लेकिन सीधे साधे सरल लोग है उनके पास भूमी का पट्टा भी इस तरीके से नहीं हैं जो एक कानूनी ढ़ग से होना चाहिए वास्तविक मालिक वो लोग है अब उन लोगो को वहां से उजाड़ा जाए एक सर्वा जुलूम पैदा किया जाएगा उनके गांव के गांव खाली करा दिए जाएंगे लाखो लोगों को और फिर पूरी ताकत लगा दी जाएगी पुलिस और ये सब लगा करके CRPF की उनको हटा दिया जाएं उनकी मल्कियत से अब लो अपनी रक्षा के लिए कुछ धनुष बाण उठाए मुकाबला नहीं कर सकते तो उनके लिए आगे आ जाते हैं माओवादी आ जाते हैं नक्सलवादी तो कहते है ये नकसलवादि को मिटाना हैं इस नाम से नक्सलवादी तो कम मरते हैं गरीव आदिवासी ज्यादा मरते हैं।

वासिंद्र मिश्र- उन नक्सली गतिविधियों में जो शामिल हैं...जो एक तरफ जैसे आप जैसे लोग जो एक्सट्रीम में जाकर इस तरह के जो तत्व है उनके बचाव में आप खड़े होते हैं वे कॉरपोरेट घराने जो एक तरफ सरकार की मदद कर रहें हैं जो Natural Resource है उसपर इनका एकाधिकार हो दूसरी तरफ नक्सलियों की भी मदद कर रहें हैं उनको आर्थिक मदद कर रहे हैं जैसे की उस Area में Insurgency बनी रहे और जो आम लोग है जो Civil life हैं वो Disturb रहें तो Corporate और नक्सलियों के बीच की जो साठ- गांठ हैं उसका फायदा उठा कर वो Natural संपदा का दोहन भरपूर मात्रा में कर सके?
अग्निवेश जी- बिलकुल ठिक कह रहे हैं आप ये जो Nexus ऐसा बना हुआ हैं की नक्सली इधर कर रहे हैं आदिवासियों को कि हम तुम्हारी रक्षा कर रहे हैं तुम्हारी जल जमीन जंगल की कुछ हद तक कर भी रहे होंगे लेकिन उनकी साठ-गांठ उन बड़े बड़े Corporate और लूटेरे परिवारों से उनसे लेन देन भी उनसे चल रहा हैं अब सरकार क्या कह रही हैं कि हम शांति लाने के लिए वहां और स्कूल और अस्पताल खोलने के लिए हमे पुलिस और CRPF भेज करके सफाई करनी हैं नक्सलवादियों से इस नाम से वो आदिवासियों को मार रहे हैं उनकों निर्दोष लोगो को जेलों में सढ़ा कर के Torture कर रहे हैं यह सब काम एक तरफ हो रहा हैं।

वासिंद्र मिश्र- लेकिन आप उन नक्सलियों का क्यों मदद करते हैं?
अग्निवेश जी- नहीं बिलकुल नहीं कर रहा मैं ...... मैं न नक्सलियों की मदद कर रहा हूं न Corporates की कर रहा हूं न सरकार की कर रहां हूं मेरा काम केवल इतना था जब 76 हमारे जवान मारे गए तो उनकी निंदा करके बाकायदा नक्सलियों की निंदा करे और मैं अपने तमाम दोस्त मित्रो के साथ जिसमें प्रभुत्व गांधी वाधी और वैज्ञानिक सब लोग हम लोग राय पुर से दंत्ते वाड़ा यात्रा लेकर गए हमारा नारा यह था कि गोली से नहीं बोली से हम नक्सलियों को ये कह रहे थे कि तु्म्हारी गोली से जो निर्दोष हमारे बचारे गरीब किसानो के बेटे है CRPF के जवान वे मारे जा रहे हैं और सरकार से हम कर रहे हैं कि तुम इसके मुकाबले नक्सलियों को तो नहीं मार पा रहें तुम जो मार रहे हो गरीब आदिवासियों को मार रहे हो तो Cross Fire में आदिवासी मारा जा रहा हैं. हमने कहा था कि ये जो गोलियों से बातचित मत करो आपस में बल्कि बातचित के द्वारा Dialouge के द्वारा इस समास्या का समाधान करो तब मुझे तब भारत सरकार के तत्कालिन ग्रह मंत्री पी चिंदबरम ने पत्र देकर के कहा जो ये आपने कहा हैं हम आपको अधिकारित हैं Introlaw cuter बनाते है आप ये काम कीजिए और जब मैंने उस काम में सफलता ला करके 20 दिन के अंदर उनको लाकर दे दी नक्सलियों के जो सबसे प्रमुख उनके नेता जो उनके प्रवक्ता था उन्होंने दस्तख़त करके पत्र भेज दिया मुझे हम बातचीत के लिए तैयार हैं चिंदबरम जी चाहते थे 72 घंटे के लिए अर्थात तीन दिन के लिए बंदूके दोनो तरफ बंद हो जाए उन्होंने कहा कि हम तीन दिन नहीं तीन महिने और छह महिने के लिए तैयार थे अब जब ये पत्र मैने चिंदबरम जी को दिया मुझे उम्मीद थी की अब वो आगे बढ़कर के कहते कि स्वामी जी आपने कमाल कर दिया वो तैयार है तो आओ जल्दी करे हम मैं उसी चिट्ठी को लेकर के चिंदबरम जी की चिट्ठी को लकर तिहाड़ जेल जो दिल्ली में जो है वहा कोबाड़ गांधी जो नक्सली Polit bureau के Member जो जेल में है उनसे में मिला उन्होंने भी कहा कि मैं बहुत बढ़िया है बातचीत के द्वारा हल हो मैं नारायण सनियाल जी से जाके रायपुर की Central jail में मिला उन्होंने भी इसका स्वागत किया तब में चाहता था कि बातचीत से यदि संभव हो जाएं तो ये जो सारा अंदर का जो गठजोड़ है ये भी मीडिया के सामने साफ आ जाएगा किस किस Corporate घराने का नक्सलियों को Supportदी जा रही हैं छिपे तौर पर।

वासिंद्र मिश्र- तो माने जो डेड लॉ़क पैदा किया तो उसमे फिर एक बार सत्ता की साज़िश शामिल है?
अग्निवेश जी- आजाद को मार डाला गया फेक एनकाउंड में वो बहुत बड़ा सेट बैक था ये लोग नहीं चाहते थे न सरकार न कॉरोपोरेट चाहते थे की ये बातचीत सफल हो और उसको जो उनकी तरफ से तैयारी आयी थी उसको उन्होंने खत्म कर दिया। 

वासिंद्र मिश्र- बहुत बहुत धन्यवाद! 

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