शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

मोदी का एक ही लक्ष्य है डेवलपमेंट फॉर ऑल: एम जे अकबर

वासिंद्र मिश्र- अकबर साहब से जानने की कोशिश करेंगे कि नई पार्टी में आने के बाद उनका क्या अनुभव है और नई पार्टी ज्वॉइन करने के पीछे उनकी क्या फिलॉसफी है... 
एमजे अकबर- देखिए पार्टी तो नई नहीं है... 

वासिंद्र मिश्र- आपके लिए... 
एमजे अकबर- देखिए इस बारे में मैं लिख चुका हूं... अंधकार भरा दशक देखने के बाद... इस बार मुझे वाकई लग रहा कि देश के लिए अगले 10 साल बहुत अच्छे जाने वाले हैं... क्योंकि बहुत दिनों के बाद एक किसी भी पॉलिटिकल पार्टी को एक नेतृत्व मिला है......जिस नेतृत्व और जिस नेता का... अर्जुन वाली आंख की तरह सिर्फ एक ही लक्ष्य है डेवलपमेंट ...मैं समझता हूं कि जो आदमी वोट मांगता हो हिन्दुस्तान की इकोनॉमी के लिए वो हिन्दुस्तान के भविष्य के लिए मांग रहा है वो अपने लिए सिर्फ नहीं मांग रहा है...और दूसरी बात,...डेवलपमेंट फॉर ऑल...सबके लिए...सब का मतलब बहुत बड़ा होता है... छोटा नहीं होता है...तो सबके लिए जब मांग रहा है...तो सबका मतलब बड़ा clear signal है कि कोई भी हिन्दुस्तानी जो है उसको पीछे नहीं छोड़ा जाए...तीसरी बात... मैं बहुत इंप्रेस हुआ...देखिए हम जब भी टीवी पर... आपसे मुलाकात हो ..या भाषण देने जाएं...या कुछ भी करने जाएं...तो हम कुछ सोच कर जाते हैं कि भई ये बोलना है, ये बोलना है... बहुत कड़े सवाल करेंगे आप... तो तैयार होकर जाओ.....लेकिन ऐसे माहौल में जहां हम बैठे हैं... अगर यहां एक क्राइसिस हो ... खासकर ऐसा क्राइसिस जिसमें जीवन मरण का सवाल उठ जाए...तो उस क्राइसिस में दिमाग सब कुछ भूल जाता है... और सिर्फ वहीं रहता है जो दिल की बात हो... नब्ज़ की बात हो....पटना में जब नरेंद्र मोदी भाषण दे रहे थे...तो वहां पर जब बम का हमला हुआ... ये हमला सभा में भाषण देने आए लाखों लोगों पर हुआ था ... उस क्राइसिस के वक्त .. जब दिमाग हट कर दिल सामने आता है तब नरेंद्र मोदी ने क्या कहा था ... नरेंद्र मोदी ने कहा हिंदुओं को तय करना पड़ेगा कि वो मुसलमान से लड़ाई करेंगे या ग़रीबी से लड़ाई करेंगे...और मुसलमानों को तय करना पड़ेगा कि हिंदुओं से लड़ाई करेंगे या ग़रीबी से लड़ाई करेंगे... मुझे लगा कि उन्होंने ये कितनी बड़ी बात कही .... हमारे सामने यही चैलेंज है कि मैं और आप एक दूसरे से लड़ें... इसमें किसका नुकसान होता है... आपका होता है मेरा होता है...लेकिन हमसे बढ़कर भी एक चीज है...इससे देश का नुकसान होता है ....ये देश आगे नहीं बढ़ सकता है... मैंने सुना तो मुझे लगा कि इनका मार्ग सही है....और इस मार्ग में हमें बिल्कुल मौका देना चाहिए... और आगे बढ़ना चाहिए... 

वासिंद्र मिश्र- अकबर साहब आप तो कांग्रेस की राजनीति को अच्छी तरह से जानते हैं...और आपने तो बहुत नजदीक से देखा है...आप मेंबर ऑफ पार्लियामेंट रहे..कांग्रेस के टिकट से.. 
एमजे अकबर- हां लेकिन याद दिला दीजिए ना 22 साल पहले की बात कर रहे हैं... ज़माना बहुत बदल गया है... 

वासिंद्र मिश्र- नहीं मैं इंदिरा जी के भी जमाने की बात करना चाहता हूं आपसे...कि कहीं न कहीं आपको लग रहा है कि जैसे इंदिरा जी का एक दौर था.. और इंदिरा वर्सेज़ ऑल हुआ करता था.. तब विपक्ष इंदिरा हटाओ का नारा लगाता था.. इंदिरा जी कहती थीं..हम गरीबी हटाना चाहते हैं.. आज के इस चुनाव में भी मोदी वर्सेज ऑल हो गया है... मोदी डेवलपमेंट की बात कर रहे हैं..और बाकी लोग मोदी को रोकने की बात कर रहे हैं... तो इन दोनों में क्या बेसिक अंतर आपको दिखाई देता है... 
एमजे अकबर- पहले तो मैं इस चीज़ से सहमत नहीं हूं..कि ये मोदी वर्सेज ऑल है.. वाजपेयी जी के वक्त में इनके साथ कितनी पार्टियां थीं ... 23 से 28 तक .... आज बीजेपी की समर्थक पार्टियों की संख्या 25 हो गई है... तो ऐसी बात नहीं है... ये कहना कि ये अकेले हैं, एक षडयंत्र है... सबसे बड़ी बात है कि जनता इनके साथ है... आप कहेंगे कि मुसलमान साथ नहीं हैं.. .यही है ना कहने को...अभी मैं नाम लूं या नहीं... पता नहीं कि उचित होगा या नहीं...पर मैं ले लेता हूं.. इंडिया टुडे का अभी ओपिनियन पोल आया... अभी इस हफ्ते...लेटेस्ट ओपिनियन पोल आया है... आपको आंकड़े सुनकर हैरानी हो जाएगी... बीजेपी के पास बिहार में 23 पर्सेंट मुस्लिम सपोर्ट है... 23 पर्सेंट... जब बीजेपी-जेडीयू गठबंधन था तब ये सपोर्ट 10-11 पर्सेंट होता था... आज वो दोगुना हो गया है... ज्यादा हो गया है... क्योंकि मुसलमान भी समझता है...मैनिफेस्टो देखता है... सुनता है कि एक व्यक्ति कह रहा है कि मैं ऐसा मुसलमान देखना चाहता हूं..जिसके एक हाथ में कुरान हो..और दूसरे हाथ में कंप्यूटर ...इससे ज्यादा और क्या चाहिए... हमें तालीम चाहिए... मुसलमान बच्चे-बच्चियों को क्या नौकरी नहीं चाहिए.. आप हर वक्त उनको एक खौफ के धुंध में फंसा के ले जाते हैं...वोट दिलवा देते हैं...मैं पूछना चाहता हूं... जो खौफ़ की पॉलिटिक्स करते हैं...भय की पॉलिटिक्स करते हैं.. जो धुंध की पॉलिटिक्स करते हैं... कि भइया आलू और प्याज का कोई मज़हब होता है... आज मैनिफेस्टो में लिखा है..इतनी बड़ी बात लिखी है.. आप गौर कीजिएगा...लिखा है कि वक्फ में जो लूट हो रही है... वक्फ में जो लूट हुई है...उसको हम खत्म करेंगे.. उस पर कार्रवाई करेंगे...लड़कियों के लिए हम ज्यादा तवज्जो देंगे... गर्ल चाइल्ड...मदरसा को हम मॉडर्नाइज़ करेंगे... कि जो लड़का बेचारा मदरसे में है...उसको हम साइंस और कंप्यूटर भी सिखाएंगे... वहां पर ऐसी बातें लिखी हैं...जिसको मुस्लिम लड़के और लड़कियों को भी एक मॉर्डन आधुनिक भविष्य नज़र आए.. हर वक्त आपने मुसलमानों के साथ...मैं क्या कहूं.. ..यानी अभी तक मुसलमान नेतृत्व कर रहे हैं...वो मुनाफे के साथ... 

मोदी का एक ही लक्ष्य है डेवलपमेंट फॉर ऑल: एम जे अकबर

वासिंद्र मिश्र- यानी अभी तक...आजादी से लेकर अभी तक जो भी पार्टियां मुसलमानों को हक दिलाने के नाम पर...उनको शिक्षा देने के नाम पर.. उनके धर्म और शरीयत के कानून को बचाए रखने के नाम पर वोट लेती रहीं..वो सब मुसलमानों को धोखा देती रहीं ... ? 
एमजे अकबर- आप देख लीजिए...खुद सच्चर कमेटी की रिपोर्ट देख लीजिए... सच्चर कमेटी की रिपोर्ट तो किसी और ने नहीं बनाया है... ये मनमोहन सरकार ने बनाया है... आप सच्चाई देख लीजिए उसमें...हर पार्टी ने मुसलमान से कुछ लिया है..वोट लिया है..कुछ दिया नहीं है... अब वक्त आ गया है कुछ देने का... भले कुछ लें ना लें....क्योंकि हर हिंदुस्तानी मुसलमान..बड़े फक्र के साथ कहता है कि मैं हिंदुस्तानी हूं... और उसका हक बनता है...और उस हक को अदा करें.. 

वासिद्र मिश्र- अकबर साहब जब आप राजीव गांधी.. के करीबी दोस्तों में थे... और जब आप मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट बने.. तो राजीव गांधी भी क्या इसी ख्यालात के थे..जो मौजूदा कांग्रेस नेतृत्व है.. 
एमजे अकबर- देखिए मैं अब क्या कहूं या न कहूं.. अभी की बात करते हैं.. अभी तो मैंने पिछले दस साल देखे हैं... और इस दस साल में मैं देखा हूं कि मुसलमान जो है... गरीबी के नर्क में है.. उनको धकेल दिया गया है... आप कहीं भी जाकर देख लीजिए ना... मुझसे बात मत कीजिए..किसी भी मुहल्ले में जाकर देखिए... और देखिए इनकी क्या हालत है.. और देखिए दो बार इन्होंने वोट दिया... यूपीए को दो बार... कई बार वोट दिया है... क्या मिला..उसी तरह कहीं ना नौकरी.. कहीं ना तालीम.. आप जो है कितना exploit करेंगे.. बहुत हो गया..और हर बार जब आपसे नौकरियां मांगते हैं.. तो आप किसी न किसी तरह दिखा देते हैं कि भई ये हो जाएगा..वो हो जाएगा... मुसलमान को कांग्रेस एक डरपोक कम्युनिटी समझती है.. समझती है कि हर वक्त वो भय के जाल में फंसाकर वोट.. लेते रहे हैं.. वो जमाना गया... मैं समझता हूं ..खत्म हो गया.. 

वासिंद्र मिश्र- अकबर साहब अभी तक मुसलमानों से उनके दिलो दिमाग में fear psychosis क्रिएट करके उनका वोट लिया जाता रहा...और उनकी जो मूलभूत समस्याएं थीं उसकी तरफ किसी भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो इस बार का जो मैनिफेस्टो आया है जिसका जिक्र आपने पहले भी किया उसमें दो बातें खास हैं... एक तो ये कि हम equal opportunity देंगे और दूसरा ये कहा गया है कि हम राम जन्मभूमि या बाबरी मस्जिद का जो विवाद है उसका अदालत के जरिए समाधान खोजने की कोशिश करेंगे... आप पत्रकार हैं और नेता भी हैं ... आपसे जानना चाहेंगे कि ...इस तरह के वायदे तो पहले भी अलग-अलग टाइम में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने किए हैं तो आपको इतना यकीन कैसे हो रहा है कि जो इस बार का मैनिफेस्टो है इसमें जो बातें कही गई हैं वो हूबहू लागू होंगी अगर सरकार में आने का मौका मिला बीजेपी को ? 
एमजे अकबर- सबसे पहली बात तो मैं ये कह दूं कि जो जो भी वहां लिखा गया है... बहुत सोच-समझ कर लिखा गया है ऐसा नहीं है कि जो बरसों से कहते रहे हैं या पुराने मैनिफेस्टो जो था उसी को फिर से डाल दो..बहुत सोच-समझकर लिखा है....मंदिर का विषय बहुत पुराना है बीजेपी के बनने से पहले का विषय है... ये तो 1857 से पहले का है यहां पर जो शुरू हुई है पूजा... वो जवाहर लाल के जमाने से शुरू हुई है...उनके जमाने में इजाज़त मिली...शिलान्यास राजीव गांधी के जमाने में हुआ तो ये लंबा विषय है..लेकिन इस बार खास बीजेपी ने कहा है कि ये कल्चरल मुद्दा है ये इलेक्शन का मुद्दा नहीं है.. ये कहा है कि हां हम मंदिर बनाएंगे लेकिन सबसे बातचीत करके सबसे सहमति लेके बनाएंगे... ये डेमोक्रेसी है ... हम democratic process से करेंगे... तो मैं समझता हूं कि इसी तरह मुल्क बढ़ेगा आगे... 

वासिंद्र मिश्र- ये बातें तो पहले भी कही जाती रही हैं अकबर साहब, चंद्रशेखर जी ने तो एक अलग सेल बना दिया था 
एमजे अकबर- बात सही है लेकिन बीजेपी ने जो commitment किया है इस बार वो बीजेपी का commitment है और बीजेपी का commitment इसलिए है कि क्योंकि उनके खिलाफ ये प्रचार चलता है कि जबरदस्ती से काम करेंगे...

वासिंद्र मिश्र- नहीं बाबरी मस्जिद का जो ढांचा गिरा उस समय भी commitment था. 
एमजे अकबर - जी नहीं वो जो जमाना था वो और था... उस जमाने में जो था मैंने तो आपको याद दिला दिया कि शिलान्यास किसने किया था....अब बीस साल गुजर गए हैं. 

वासिंद्र मिश्र- अब आपको लग रहा है कि बीजेपी को लग रहा है कि राम मंदिर के नाम पर वोट नहीं मिलेगा इसलिए डेवलपमेंट की बात करो... 
एमजे अकबर- जी नहीं, बीजेपी वोट की राजनीति नहीं करती इन सब चीजों में...और बीजेपी ने ये तय कर लिया है कि अब ये कल्चरल मुद्दा है और इस कल्चरल मुद्दे का सर्वसम्मति से हम एक सॉल्यूशन निकालेंगे और निकालना चाहिए... 10 साल से यही जो सरकार थी इसके पास मौका था. 10 साल से लोगों से बात करके कुछ तो आगे बढ़ते...10 साल से खामोशी क्यों...तो इसलिए एक ये है...आपने और बातें कही हैं. मैनिफेस्टो में मैं समझता हूं बहुत जरूरी हैं...एक तो नौकरी...10 साल से बच्चों की आप ये मुसलमानों की बात कर रहे हैं, मैं मुसलमान, हिंदू सबकी बात कर रहा हूं. जो बच्चा 20 साल का था 2004 में, जो बच्ची 20 साल की थी 2004 में, आज वो 30 साल की हो गई. अगर बच्ची है तो मां बन गई है, बच्चा है तो बाप बन गया है, लेकिन उसकी किस्मत में नौकरी नहीं आई...आपसे मैं कहता हूं आपके 20 से 30 के बीच में नौकरी न मिल पाए तो आपका सेल्फ कॉन्फिडेंस टूट नहीं जाएगा...टूट जाएगा... आपकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी, तो इस यूपीए ने तो एक जेनरेशन की जिंदगी बर्बाद की है...आज अगर गुस्सा है कि इस सरकार के खिलाफ तो इसके बड़े कारण हैं. इसके बड़े सॉलिड कारण हैं...तो ये जो है अगले 10 सालों में नौकरी वापस लाओ, रोटी वापस लाओ... मुझे एक सज्जन ने अभी जब मैं बंबई गया था. तो जब गाड़ी चला रहा था तो उन्होंने बहुत अच्छी बात कही... बॉम्बे के बारे में, कहा कि देखिए अगर ऐसा ही चलता रहा तो 5 साल में बॉम्बे से मिडिल क्लास गायब हो जाएगा.यानी मिडिल क्लास इतना गरीब बन जाएगा कि अपने आप को मिडिल क्लास कहने के लायक नहीं रहेगा...ये है जनता के दिल की आवाज़... और ये जो है इसलिए... अब और आप जो कह रहे हैं मैनिफेस्टो में, उर्दू की हम जो माइनॉरिटी की हैरिटेज को बचाएंगे और उर्दू को प्रमोट करेंगे, ये सब जो हैं कई वादे हैं जो बीजेपी ने दिए हैं...और मैं ये समझता हूं कि ये बहुत सोच समझ के दिए हैं राइट और मेरा पूरा यकीन है कि ये गुमराह करने के लिए नहीं है. 

वासिंद्र मिश्र- माने ये महज चुनावी वायदे नहीं हैं बीजेपी को सत्ता में लाने के... एक बहुत गंभीर आरोप लग रहे हैं नरेंद्र मोदी पर बार-बार कि एक तो नरेंद्र मोदी पार्टी से ऊपर होकर काम कर रहे हैं, और दूसरा आरोप ये लग रहा है कि नरेंद्र मोदी कॉर्पोरेट घरानों के प्रोजेक्टेड प्राइमिनिस्ट्रियल कैंडिडेट हैं 
एमजे अकबर- लोगों के पास कहने के लिए कुछ नहीं रहता है तो ये सब पता नहीं कहां उड़ा के आते हैं...नरेंद्र मोदी तीन इलेक्शन जीत चुके हैं. ये कॉर्पोरेट के कहने पर वहां की जनता इलेक्शन जिता रही है क्या ? ... आज नरेंद्र मोदी ह्रदय सम्राट हैं देश के... ज़ी ने ओपिनियन पोल की है आपने भी किए हैं...किए हैं कि नहीं, तो जनता क्या कह रही है, जनता की आवाज़ सुनो. जनता कह रही है कि ये हमारी बात कर रहा है. ये wasted interest की बात नहीं कर रहा है. 

वासिंद्र मिश्र- अकबर साहब आपको नहीं लग रहा है इस समय देश का जो राजनैतिक माहौल है वो पोस्ट इमरजेंसी जैसा बनता जा रहा है कि जनता आगे आ गई थी और राजनैतिक दल पीछे हो गए थे कांग्रेस के खिलाफ...कमोबेश वैसी ही स्थिति दिख रही है इस बार... 
एमजे अकबर- पता नहीं अब इतिहास बताता है कि कोई एक आईना नहीं है. कोई भी एक वक्त पिछले का पूरा आईना नहीं होता क्योंकि वक्त एक नई दिशा लेता है हर वक्त और जब नए सिचुएशन होते हैं तो कोई exact comparison नहीं कर सकता मैं...लेकिन इतना जरूर है कि ये इलेक्शन एक शुरुआत है..नई शुरुआत 

वासिंद्र मिश्र- बदलाव की ? 
एमजे अकबर- अब ये हिंदुस्तान बदलेगा... अभी तक जो हिंदुस्तान करवट लेकर नीचे की तरफ जा रहा था...इस बार करवट लेकर खड़ा हो रहा है...और जब मुल्क खड़ा होता है तब बहुत पावरफुल होता है मुल्क और खास तौर पर हमारे हिंदुस्तान की और हमारे भारत की जो ताकत है वो एकता में है ... .मैं समझता हूं दुनिया कांप जाएगी इस ताकत से.

वासिंद्र मिश्र- आजकल एक विवाद शुरू हुआ है और डिबेट हो रहा है उस पर. दो किताबें आई हैं एक किताब परख साहब की और दो दिन पहले आपके शायद जूनियर कलीग रहे होंगे एक समय में... 
एमजे अकबर- नहीं मेरे कलीग नहीं 

वासिंद्र मिश्र- संजय बारू. हम लोगों ने टाइम्स ऑफ इंडिया में काम किया है ...उस समय संजय भी थे टाइम्स ऑफ इंडिया में...ये दो किताबें आई हैं. एक लेखक होने के नाते आपने भी ढेर सारी किताबें लिखी हैं उन किताबों से ज्यादा उन किताबों के रिलीज़ होने के टाइमिंग पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.और कहा जा रहा है इन किताबों के जो लेखक हैं उनका कहीं न कहीं पॉलिटिकल एजेंडा है....और इन किताबों के ज़रिए वो मौजूदा सरकार को, मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टी को डैमेज करना चाहते हैं चुनाव में...कंटेंट पर कम उनके टाइमिंग और intetion पर ज्यादा debate हो रहा है... आपकी नजर में एक राइटर के नाते, एक वेटरन जर्नलिस्ट के नाते उन किताबों में जो बातें लिखी गई हैं. उसमें कितनी आपको रियलिटी नज़र आ रही है. 
एमजे अकबर- देखिए सच तो वो जानता है जो अंदर था मैं तो अंदर नहीं था आप तो अंदर नहीं थे इस हुकूमत के...ये तो वो लोग थे जो प्राइम मिनिस्टर के साथ काम किए थे, ये रोज देखते थे कि क्या हो रहा है, देखते थे कि प्राइम मिनिस्टर और मिसेज सोनिया गांधी में रिमोट कंट्रोल कितना है कौन ऊपर है कौन नीचे है. कौन व्यक्ति जो है वो यहां की बात वहां पहुंचाता है, कहां से असल ऑर्डर आते हैं और कहां पे नकली चेहरा दिखाया जाता है. यही लोग जानते हैं तो ये जो हैं अब सामने आए हैं. इससे ये ज़ाहिर होता है कि सच्चाई को आप कुछ देर तक धुंध में छुपा सकते हैं लेकिन सच्चाई कभी गायब नहीं होती. एक न एक दिन तो सच्चाई उठकर आकर अपने आप को ज़ाहिर करेगी. 

वासिंद्र मिश्र- Truth Always Prevails
एमजे अकबर- yes truth always prevails

वासिंद्र मिश्र- नहीं ....उसमें जो कंटेंट है... 
एमजे अकबर- वो खुद ये कह रहे हैं, कि ये मैंने खुद देखा था. अब मैं ये क्यों कहूं कि वो झूठ कह रहे हैं, दूसरी बात कि वो कौन सा वक्त चुने हैं पब्लिकेशन के लिए, भई अब तो ये उनकी मर्जी है और उनके पब्लिशर का फैसला है वो तो अपनी जगह है उस डिबेट में शामिल होने से मेरा क्या फायदा है...लेकिन एक बात ज़रूर है मैं खुद सोचता हूं एक व्यक्ति की तरह not as a party person, एक व्यक्ति की तरह मैं सोचता हूं अगर आप देख रहे थे कि कुछ हालात ऐसे हो रहे हैं जिससे मुल्क की बर्बादी हो रही है, मुल्क की बर्बादी हो रही है तो आपका conscience कहां था. 

वासिंद्र मिश्र- उस समय आपने क्यों नहीं विरोध किया... 
एमजे अकबर- उस समय आपको विरोध करना चाहिए था. आप जो भी पूर्व सेक्रेटरी हों या जो भी... 

वासिंद्र मिश्र- मीडिया एडवाइज़र ही थे... 
एमजे अकबर- हां और आप मीडिया एडवाइज़र थे और आप देख भी रहे थे कि मेरा मुल्क बर्बाद हो रहा है तो शायद उस वक्त ही आपको कुछ कहना था और उस वक्त अगर कहते तो शायद ये बातें इतनी बुरी तरह से बाहर नहीं जातीं...लेकिन चलिए जो भी हुआ हो ... I don`t want to criticise ... लेकिन देर आए दुरुस्त आए. 
वासिंद्र मिश्र- बहुत-बहुत धन्यवाद 

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