रविवार, 9 मार्च 2014

सत्ता का जिताऊ फॉर्मूला...

लोकसभा के लिए जैसे-जैसे राजनीतिक दलों ने टिकट बांटने शुरु किए हैं ... वैसे वैसे मायूस प्रत्याशियों की नाराजगी की खबरें भी सुर्खियां बन रही हैं .... दरअसल टिकट बांटने का फॉर्मूला ही कुछ ऐसा होता है जो टिकट पाने वालों में सीट को लेकर और इससे वंचित रहने वाले लोगों में टिकट को लेकर नाराजगी पैदा कर देता है ....
सत्ता के संघर्ष में हर चीज़ जायज़ होती है ... चाहे विपक्ष पर हमला करने की रणनीति छोड़कर जाति धर्म की बात करना हो या फिर टिकटों के बंटवारे में सिर्फ और सिर्फ जिताऊ उम्मीदवारों को चुनना .. चाहे वो भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी गई तथाकथित लड़ाई के बीच भ्रष्टाचारियों से हाथ मिलाना हो ...

इन मुद्दों को समझने के लिए हमें इस देश की सियासत को समझना होगा... किसी भी राजनीतिक दल का एक ही लक्ष्य होता है और वो है सत्ता ... सत्ता के लिए सभी दल हर छोटी-बड़ी चीजों को बारीकी से देखते हुए अपना फैसला लेते हैं ... टिकटों के बंटवारे में जिताऊ फॉर्मूले को ध्यान में रखा जाता है ... कोई भी राजनीतिक दल उसी कैंडिडेट को टिकट देता है जिससे उसे जीत की उम्मीद हो ... इसके लिए ग्राउंड लेवल के समीकरण देखे जाते हैं .... और भले ही देश 21वीं सदी में हो और विकास के बड़े-बड़े सपने देख रहा हो ...अभी भी देश की कई सीटें ऐसी हैं जहां ग्राउंड लेवल पर जाति और संप्रदाय का समीकरण ही मायने रखता है ...

शायद यही वजह है कि राजनैतिक दल जब टिकटों का बंटवारा करते हैं तो इसी समीकरण का ध्यान रखते हैं ...
लेकिन इस आधार पर अपना गणित सुधारने वाली पार्टियों के आंकड़े के तब गड़बड़ाने लगते हैं जब इस जिताऊ फॉर्मूले की वजह से अंतर्विरोध शुरु हो जाता है .... साल भर मूल्यों की बात करने सुनने वाला कैडर अचानक आए इस फॉर्मूले को पचा नहीं पाता और reject कर देता है ... और शायद इसी वजह से अलग अलग पार्टी कार्यालयों में कैडर का विरोध सामने आ जाता है ... इस अंतर्विरोध का शिकार कैंपेन के दौरान या चुनाव के वक्त लगभग सभी दलों को होना पड़ता है चाहे वो पार्टी अनुशासित होने का कितना भी दावा क्यों ना करती हो ...   इस बार भी टिकट बंटवारे के साथ ही अलग अलग दलों और जगहों से विरोध के सुर उठ रहे हैं ...
 
  • वाराणसी सीट को लेकर बीजेपी में उठा विवाद इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बना हुआ है .. 13 मार्च को इस सीट पर फैसला होगा लेकिन ये सीट मोदी को दिए जाने को लेकर मुरली मनोहर जोशी का विरोध जगजाहिर हो चुका है .. कर्नाटक के बेल्लारी सीट से श्रीरामुलु को टिकट दिए जाने की चर्चा पर बीजेपी में इतनी खींचतान हुई कि अभी तक श्रीरामुलु का नाम उम्मीदवारों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है ...
  • वहीं टिकट ना मिलने से नाराज उत्तर प्रदेश के मोहनलालगंज से कांग्रेस नेता श्यामलाल पुजारी को पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने की वजह से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है ...
  •  भोपाल में भी कांग्रेस को झटका लगा है .. भिंड से टिकट दिए जाने के बावजूद भागीरथ प्रसाद ने 24 घंटे बीतते-बीतते कांग्रेस छोड़ बीजेपी ज्वाइन कर ली है ...
  • आरजेडी में पाटलिपुत्र सीट को लेकर भी जमकर घमासान हुआ है ... लालू यादव की बेटी मीसा भारती और आरजेडी के वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव के बीच छिड़े इस घमासान की प्रतिक्रिया के तौर पर राम कृपाल यादव पार्टी छोड़ चुके हैं ...
  • हरियाणा में विवादित नेता विनोद शर्मा के कांग्रेस पार्टी छोड़ हरियाणा जनहित कांग्रेस ज्वाइन करने की खबरों पर भी सुषमा स्वराज कड़ी आपत्ति दर्ज करा चुकी हैं.. हरियाणा में बीजेपी और कुलदीप बिश्नोई की पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस में गठबंधन है ...
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाकर सियासी गलियारो में कदम रखने वाले अरविंद  केजरीवाल भी इन दिनों सत्ता की राजनीति ही कर रहे हैं ... टिकट बंटवारे में जिताउ फॉर्मूला देखा जा रहा है भले ही उम्मीदवार सिर से पैर तक भ्रष्टाचार में ही क्यों ना डूबा हो ... डिफॉल्टर घोषित किए जा चुके खालिद परवेज और 300 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोपी योगेश दहिया उन्हीं में से एक है ..
ऐसे में साफ है कि हर पार्टी का लक्ष्य एक ही है और वो है सत्ता हासिल करना चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी तरह के समीकरण क्यों ना बनाने पड़ें ...

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