मंगलवार, 18 मार्च 2014

अटल-आडवाणी युग की समाप्ति ?

बीजेपी के लिए 2014 का चुनाव कई मायनों में अलग है ... इस बार अटल बिहारी वाजपेयी नहीं हैं ... इस बार आडवाणी भी बहुत कम ही दिखाई देते हैं ... सुषमा स्वराज के वो भाषण भी आजकल कम ही  सुनाई देते हैं जिन्हें सुनने के लिए एक ज़माने में कॉलेज से स्टूडेंट्स और प्रोफेसर्स भी रैलियों में नज़र आया करते थे तो क्या ये बीजेपी के लिए एक युग का अंत है .. क्या ये नए युग की शुरुआत है  ?

बीजेपी में हुए टिकट बंटवारे ने एक बात साफ कर दी है कि पार्टी में ट्रांजिशन ऑफ पावर भी हो चुका है ... खासकर उत्तर प्रदेश या फिर हिंदी हार्टलैंड में हुए टिकटों के बंटवारे ने ये दिखा दिया है कि बीजेपी के अटल आडवाणी ERA का अंत हो चुका है ... लंबी बहस और मान मनौवल के बाद वाराणसी की सीट नरेंद्र मोदी के पास है और लखनऊ की सीट राजनाथ सिंह के पास ... बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को अपनी सीट नरेंद्र मोदी के लिए खाली करनी ही पड़ी ... क्य़ोंकि मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहते थे ताकि राजनीति के लिहाज से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश से ही अपनी दावेदारी पेश करें .. अयोध्या आंदोलन के दौरान पूर्वांचल में बीजेपी की जबरदस्त लहर रही थी और इस लिहाज से प्रूर्वांचल की सबसे अहम सीट वाराणसी बीजेपी के लिए बेहद खास है ... अगर मोदी अपनी जगह यहां से बना लेते हैं तो बीजेपी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं के बराबर खड़े हो जाएंगे ...

 वहीं 1991 से  बीजेपी के पास रही लखनऊ सीट राजनाथ सिंह ने अपने पास रखी है ... ये वो सीट है जहां सक्रिय राजनीति से दूर हो चुके अटल बिहारी वाजपेयी का जादू अब भी कायम है ... हालांकि जब मोदी को पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान की कमान सौंपी गई थी तभी ये बात साफ हो गई थी कि बीजेपी में पुराने और वरिष्ठ नेता अब सेंटर स्टेज पर नहीं रहे... और अब कमान नरेंद्र मोदी के हाथ में है ... मोदी के साथ कदम मिलाकर चल रहे हैं पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह और इसके बाद पार्टी में किसी नेता ने कमान संभाली हुई है तो वो हैं अरुण जेटली ... राज्यसभा में नेता विपक्ष की कमान संभाल रहे जेटली इस बार लोकसभा जाने की तैयारी में हैं और उन्हें अमृतसर से टिकट दिया गया है .... आडवाणी और सुषमा हाशिए पर जा चुके हैं तभी तो उऩके खुले विरोध के बावजूद येदियुरप्पा और श्रीरामुलू जैसे नेता पार्टी में जगह पा चुके हैं ...  टिकटों के बंटवारे के साथ साथ जिस तरह से NDA के लिए सहयोगी पार्टियों पर फैसला लिया गया है इसने साफ कर दिया है कि अब पार्टी की कमार पूरी तरह इन्हीं तीनों के हाथ में है और मोदी सेंटर स्टेज पर हैं ...

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