शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

Democracy

लोकतंत्र बनाम निजी स्वार्थ 
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राजनीति में सब कुछ जायज़ है ।लोकतंत्र और देश  ऐसे मुद्दे हैं जिनको ढाल बनाकर अपने हितों की रक्छा की हर सम्भव कोशिस होती रही है ।
राजनीति में नयी पिड़ी और पुरानी पिड़ी का संघर्ष कोई नया नहीं है ।लेकिन जब तक अपना भला होता रहता है तब तक सब ठीक है ।नेतृत्व और उसकी नीतियाँ ठीक है ।अपने हितों के ख़िलाफ़ काम होते ही लोकतंत्र ख़तरे में पड़ जाता है ।
राजनीति के इस syndrome से भारत का कोई भी राजनैतिक दल अछूता नहीं है ।आज हम congress की मौजूदा विद्रोह और इसी syndrome का विश्लेषण करने की कोशिस करेंगे ।
Congress में इस बार के विद्रोह का नेतृत्व ग़ुलाम नबी आज़ाद कर रहे हैं वही ग़ुलाम नबी जो लगभग चालीस साल तक सत्ता के शीर्ष पर रहे ।उनके बारे में कोंग्रेस्सियों के बीच में एक मज़ाक़ चलता था ।उनके विरोधी उन्हें सत्ता का ग़ुलाम कह कर उनका मज़ाक़ उड़ाते थे।
नेतृत्व के क़रीब रहते हुए ग़ुलाम नबी और अहेमद पटेल सरीखे इन नेताओं ने मुस्लिम समाज के किसी भी दूसरे नेता को भरसक आगे बड़ने से रोकने की कोशिस की ।आज वही ग़ुलाम नबी पार्टी के कमजोर होने पर घड़ीयली आशू बहा रहे हैं ।
यह सच है की राहुल गांधी में संघटन को लेकर आगे बढ़ने की कूबत नहीं है ।राहुल के बारे में मैं पहले भी लिख चुका हूँ की वे defocussed, inconsistent,whimsical styleसे राजनीति कर रहे हैं ।
लेकिन ग़ुलाम नबी एंड company को congress पार्टी को मज़बूत करने से किसने और कब रोका ।ये सभी तो congress की apex body congress working committee के भी मेम्बर रहे हैं ।
Congress पार्टी के भीतर के ज़्यादातर फ़ैसले इनकी रज़ामंदी से होरे रहे हैं । 
वास्तव में इन नेताओं को अपने political future and rehabilitation की चिंता है । ठीक उसी तरह जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया को थी ।
राजनैतिक दलों में एक दूसरे को कमजोर करने आंतरिक विद्रोह को हवा देने की परम्परा  पुरानी है ।इतिहास गवाह है कि इस तरह की वारदातें पहले भी होती रही हैं एक दिन पहले जम्मू में केसरिया पगड़ी बांधे ग़ुलाम नवी गैंग का जमावड़ा उसी की एक बानगी है ।
Congress इसके पहले भी विभाजित होती रही है । नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक कई बार पार्टी टूट चुकी है ।लेकिन यह भी सच है की भारत की जनता ने उसी congress को असली congress माना जिसका नेतृत्व नेहरू गांधी परिवार ने किया ।
आंतरिक विद्रोह की शिकार तो भाजपा भी रही है जनसंघ के समय से लेकर अब तक इस पार्टी में भी कई बार बिखराव देखने को मिलता है ।बलराज मधोक से लेकर कल्याण सिंह b s yedurappa ,यशवंत सिन्हा शत्रुघन सिन्हा अरुण सूरी और सुब्रमणियम स्वामी तो पार्टी नेतृत्व और नीतियों के ख़िलाफ़ अपनी अलग राय ज़ाहिर करते रहे हैं ।
दिलचस्प बात यह है की राहुल गांधी आज के बाग़ी भाजपा नेताओं की तारीफ़ ठीक उसी तरह से करते रहे हैं जैसे श्रीमान आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी ग़ुलाम नबी की तारीफ़ कर रहे हैं ।
इस तरह के राजनैतिक उठा पटक से छेत्रिय पार्टियाँ भी ग्रसित रही हैं ।वाम पंथी पार्टियाँ समाजवादी पार्टी Tdp,dmk ,aiadmkसब के सब इस तरह के कलह से गुजराती रही हैं ।
और इस तरह के आंतरिक गुटबाज़ी और विघटन में शामिल नेता हमेशा लोकतंत्र और देश , सिद्धांत की दुहाई देते रहे हैं ।

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

elections in 5 states

सत्ता हर क़ीमत पर 
सत्ता ही परमो धर्मों 
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देश की दोनो national parties- congress and bjp ,सिर्फ़ और सिर्फ़ सत्ता की राजनीति कर रही है ।
इनका एक मात्र सिद्धांत येन केन प्रकारेड सत्ता हासिल करना है । 
जिन राज्यों में विधान सभा चुनावों का एलान हुआ है उनमें कमोबेस यही स्थिति दिखायी दे रही है ।
केरल में congress और left parties एक दूसरे के ख़िलाफ़ मैदान में हैं राहुल गांधी और मुख्य मंत्री विजयन एक दूसरे की खुली आलोचना कर रहे हैं 
राहुल गांधी केरल से सांसद भी हैं और congress संघटन पर भी केरल लॉबी का दबदबा है 
वैसे भी केरल की सत्ता udf और ldf के वीच में हस्तांतरित होती रही है इसलिए congress को वहाँ पर ज़्यादा वेहतर सम्भावना दिखायी दे रही है ।
लेकिन वेस्ट bengal के चुनाव में congress  और left ममता और भाजपा के मुक़ाबले एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं 
West bengal में ममता की दस साल से सरकार है पिछले लोक सभा चुनाव में भाजपा को 40 फ़ीसदी वोट मिले थे 
भाजपा को वहाँ सत्ता मिलती दिखायी दे रही है शायद यही कारण है की भाजपा ने सत्ता और संघटन की पूरी ताक़त झोंक दी है 
सत्ता हथियाने की इस दौड़ में भाजपा ने उन ज़्यादातर दागी tmc नेताओं को भी अपने दल में मिला लिया है जो ममता बनर्जी सरकार के कथित घोटालों में भी शामिल थे और जाँच के दायरे में हैं
भाजपा एक तरफ़ उन्ही कथित घोटालों को मुद्दा बनाकर ममता को सत्ता से वेदख़ल  करना चाहती है practically कहा जा सकता है की north east की तरह वेस्ट bengal में भी भाजपा दूसरे दलों के आयातित नेताओं की मदद से चुनाव में है अटल जी के वक्त तो ममता बनर्जी भी nda का हिस्सा थी और केंद्र सरकार में मंत्री थीं ।
ठीक यही स्थिति तमिल नाडु की राजनीति में दिखायी दे रही है  ।भाजपा वहाँ पर aiadmk और congress  dmk के कंधे पर वैठ कर चुनाव में उतर रही है ।कई दशकों की कोशिस के वावजूद दोनो national parties कोई ख़ास जनाधार नहीं बना पायी हैं।
असम में भाजपा सत्ता में है और अपनी सत्ता बचाए रखने की जुगत में है असम भाजपा में भी आयातित नेताओं की बहुतायत है ।Congress ने इस बार नए नए local parties से तालमेल किया है ।
पांडिचेरी में तो कांग्रिस की ही सरकार थी चुनाव के एलान के ठीक पहले वहाँ की सरकार को defection करवाकर गिरवा दिया गया था । किरण वेदी के जरिये वहाँ की सरकार को लगातार परेशान कराया जाता रहा ।देखना है इस बार वहाँ की जनता किसको चुनती है ।
महाभारत में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को ज्ञान देते हुए कहा था कि राजनीति और लड़ाई में सब जायज़ होता है ।
ऐसा लगता है की दोनो National parties के नेताओं ने गीता ज्ञान को अपना लिया है और सत्ता ही परमो धर्मों के मार्ग पर चल रहे हैं ।

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

Govt of india

भारत सरकार ने ott platforms के ज़रिए समाज एवं देश विरोधी भ्रामक खबरों को रोकने के लिए तैयारी शुरू की है 
इस बात की जानकारी देश के दो मंत्रियों श्री रवि शंकर प्रसाद और प्रकाश जावडेकर ने दी है 
सरकार की कोशिस झूठी खबरों को रोकने की है 
सरकार चाहती है की t v channels पर चलने वाले कांटेंट्स की मॉनिटरिंग के लिए गठित nba  और प्रिंट मीडिया के लिए गठित press council of india की तरह self regulatory body  चाहती है 
सरकार के फ़ैसले क़ाबिले तारीफ़ हैं
लेकिन सवाल तो Nba और press council की fairness aur relevance पर उठते रहे है क्या प्रस्तावित व्यवस्था पूर्व के अनुभवों से सबक़ लेते हुए भारतीय सविधान में नागरिकों को मिले अधिकारों की हिफ़ाज़त करेगी

Rahul gandhi

राजनीति के  समुद्र में गोता लगाते राहुल गांधी —————————————-
गोता लगाते राहुल गांधी ।आख़िर कब तक सत्य की खोज में भटकते रहेंगे ?
राहुल सक्रिय राजनीति में आने से पहले से पूरे देश और दुनिया का भ्रमण कर चुके है ।देश और दुनिया की समस्याओं से रूबरू होते रहें हैं ।
राहुल का dialogue with people अभियान अब और कब तक जारी रहेगा अपनी defocused, inconsistent aur escapist tendency के लिए मशहूर राहुल गांधी को अगर भारतीय जनता पार्टी सहित उनके विरोधी अगर मज़ाक़ उड़ाते हैं तो इसके लिए काफ़ी हद तक वे खुद ज़िम्मेदार हैं 
अभी हाल में south india के दौरे पर गए राहुल गांधी का मछुआरों के साथ समुद्र में छलांग लगाना एक 136साल पुरानी कांग्रिस पार्टी के नेता के रूप में उनके गम्भीर छबी के मुनासिब नहीं है 
भारत और रुस के राजनैतिक और सामाजिक हालात अलग हैं रुस के president Putin इस तरह के करतब दिखते रहते है कभी जिम में वरजिस करते हुए अपनी विडीओ रिलीज़ करना तो कभी वर्फ़िलीग्राउंड पर हॉकी खेलना 
लेकिन भारतीय जनमानस को इस तरह की हरकतें पसंद नहीं आती हैं
भारत के जिस भी नेता ने अपनी विलासिता और दिल फेंक आचरण का प्रदर्शन किया जनता ने उसे पसंद नहीं किया यह अलग बात है की उसकी सत्ता और police के चलते जनता चुप्पी साधे रही और सही वक्त पर अपनी नाराज़गी जताती रही 1977  के चुनाव परिणाम हम सबके सामने हैं
यह सच है की राहुल विरोधियों ने सोशल मीडिया के ज़रिए उनकी छबि को ख़राब करने की भरपूर कोशिस की है लेकिन इसके लिए राहुल खुद भी ज़िम्मेदार हैं
देश के हालात और मीडिया तथा जूडिशीएरी की भूमिका पर भी लोगों की अलग अलग राय है 
राहुल सहित भाजपा विरोधियों का आरोप है कि मीडिया की निस्पछता सवालों के घेरे में है
लेकिन यह भी सच है की औरों के मुक़ाबले भाजपा की सक्रियता ज़्यादा है 
भाजपा पंचायत से लेकर संसद तक सभी चुनाओ को जिस आक्रामक और परिश्रम से लड़ती है उस तरह की मेहनत बाक़ी लोगों की तरफ़ से देखने को नहीं मिलती 
जिन धूड्डा तीन पाइयाँ 
गहरे पानी पैठ 
मैं बपुरा बुड़न डरा 
रहा किनारे बैठ 
ऐसा लगता है कि देश के मौजूदा हालात में सभी राज नेताओं को इस कालजयी दोहे से सबक़ लेकर अपनी रणनीति बनानी चाहिए

बुधवार, 10 फ़रवरी 2021

congress

दिशाहीन congress और राहुल गांधी का तुनक मिज़ाजी रवैया 

Congress पार्टी एक और विभाजन के कगार पर खड़ी है इस बार के सम्भावित विभाजन  के लिए राहुल गांधी को ज़िम्मेदार माना जाएगा 
राहुल गांधी की तुनक मिज़ाजी और एकला चलो की नीतियाँ ज़्यादा ज़िम्मेदार होंगी ।राहुल इस बात को कई बार बोल चुके है की वे अकेले लडेंग़े।
वास्तव में विभाजन की नीव तो २०१९ के चुनाव परिणामों के समय ही पड़ गयी  थी जब चुनाव में पराजय के कारणो का पता लगाने  के लिए बनी अंटोनी committee की सिफ़ारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था 
पार्टी में इंदिरा गांधी के वक्त हुआ विभाजन operation kamraj plan aur emergency lagu karne ki wajahon se hua tha 
Rajiv गांधी के वक्त के विभाजन की वजह शाह बानो केस और बोफ़ोर्स घोटाला था ।लेकिन इस वार के सम्भावित  विभाजन की वजह राहुल होंगे ।

हमारे देश का मिज़ाज लोकतांत्रिक है हम universal brotherhood and coexistence के सिद्धांत पर चलते रहे हैं अछे लोकतांत्रिक व्यवस्था में participatory democracy ko behtar mana jata hai 
लेकिन राहुल गांधी का तरीक़ाguerilla tactics का है आरोप लगाओ और बग़ैर जवाब सुने भाग लो 
डिबेट की चुनौती दो और जबसामने  वाला तैयार हो जाय तो भाग लो 
 चाहें वह संसद केभीतर  हो या बाहर 
संघटन और सरकार को रिमोट कंट्रोल से चलाने की सोच  इस सबसे  पुरानी पार्टी की  दुर्दशा का करण है ।!
राहुल गांधी द्वाराparliament  के दोनो सदनो में ऐसे नेताओं को आगे किया जाता रहा है जो अपने अपने होम स्टेट्स में कांग्रिस पार्टी का बर्बाद कर चुके हैं 
ज़्यादातर आधार हीन अदूरदर्शी नेता ही राहुल की पहली पसंद हैं 
राहुल अक्सर  crucial मौक़े पर विलु।प्त हो जाते है चाहे वह parliament का डिबेट हो या पार्टी के कार्य कर्म।राहुल की राजनीति में consistency ,commitment aur conviction नहीं दिखायी देता ।
कांग्रिस पार्टी के फ़ाउंडेशन डे के मौक़े पर राहुल नदारत थे किसान आंदोलन जब परवान पर था तब नदारत ।
कांग्रिस के group 23 का letter bomb पार्टी की अंदरूनी हालात को ज़ाहिर कर चुका है 
हम इस मुद्दे पर अपने पहले के लेखों में तफ़्सील से लिख चुके हैं पार्टी के नेताओं में अपने future की चिंता है ।
किसी को फिर से राज्य सभा की सीट का दरकार है तो किसी को अपने हज़ारों करोड़ रुपए के साम्राज्य को बचाने की चिंता है ।
ग़ुलाम नबी आज़ाद भीऐसे नेताओं में  से एक है ।
कश्मीर से धारा ३७०  हटाने के ख़िलाफ़ छाती पीट कर रोने वाले ग़ुलाम अब उसी कश्मीर में विकास की गंगा बहते देख रहे है ।खुद को सबसे भाग्यशाली भारतीय मुसलमान बता रहे हैं ।उनका यह भी दावा है की उन्होंने अपने पूरे राजनैतिक जीवन में कभी पाकिस्तान की यात्रा नहीं की .
ग़ुलाम नबी के इन बयानो को उनकी भावी योजनाओं के संकेत के रूप में देखा जा सकता है ।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और ग़ुलाम नबी आज़ाद का एक दूसरे के प्रति दोस्ती का इज़हार भी एक भावी राजनीति का हिस्सा है ।
वास्तव में पार्टी की मज़बूती नेतृत्व के मज़बूती से होती है ।workers aur cadres  नेता को follow करते हैं।लेकिन  राहुल के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग है । ऐसा लगता 
है की राहुल गांधी अभी राज नीति का  tuition ही ले रहे है । 136 साल पुरानी पार्टी की इतनी दुर्गति किसी ने सोची भी नहीं थी 
देश के प्रधानमंत्री ने   सच ही कहा है कि कांग्रिस पार्टी लोक सभा और राज्य सभा में  divided है । एक ही मुद्दे पर संसद के दोनो सदनो में पार्टी के नज़रिया अलग अलग देखने को मिलता है ।
राहुल ज़्यादा तर राज्यों में अपने विरोधियों के मुक़ाबले हथियार डाले दिखायी दे रहे हैं
West bengal bihar aur north east  के राज्यों में पार्टी की हालत ठीक नहीं है ।
West bengal aur assam में चुनाव है और राहुल गांधी पूरे scene से ग़ायब है 
आख़िर इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है ।
आज की तारीख़ में congress party ka netritwa पूरी तरह confused and defocused dikhayee दे रहा है । राहुल को नेहरू और इंदिरा जी की नितियों को समझहना चाहिए ।
पार्टी का ट्रेडिशनल support base अलग रहा है ।शायद  यही कारण है की पार्टी के भीतर असंतोष बड़ रहा है ।अगर समय रहते इस पर क़ाबू नहीं किया गया तो पार्टी का एक गुट अलग होकर भाजपा का दमन थाम लेगा ।राज्यों में यह कार्य तो पहले से ही शुरू हो गया है।

सोमवार, 18 जनवरी 2021

Tug of war

उत्तर प्रदेश का अपना अलग इतिहास और पहचान रहा है 
आज़ादी से लेकर अब तक उत्तर प्रदेश का राजनैतिक नेतृत्व हमेसा केंद्रीय सत्ता के समानांतर अपनी सत्ता चलाता रहा है 
इसकी शुरुआत पंडित जवाहर लाल नेहरू  और पंडित गोविंद बल्लभ पंत के बीच चले खिच तान हुई ।चंद्रा भान गुप्ता कमला पति त्रिपाठी चौधरी चरण सिंह सुचिता कृपलानी विश्व नाथ प्रताप सिंह हेमवती नंदन बहुगुणा बीर बहादुर सिंह कल्याण सिंह मुलायम सिंह मायावती और अखिलेश यादव ने मुख्य मंत्री रहते हुए केंद्रीय सत्ता से अपनी अलग राय और अलग पहचान बनाए रखने की कोशिस की 
उत्तर प्रदेश कभी भी पिछलग्गू बन कर नहीं रहा देश के ज़्यादातर प्रधान मंत्री उत्तर प्रदेश से हुए है राजनैतिक तौर पर उत्तर प्रदेश हमेशा देश को दिशा देता रहा है 
शायद यही कारण है की उत्तर प्रदेश का मुख्य मंत्री खुद को first among equal के रूप में मानता है 
उत्तर प्रदेश ke mukhya mantriyon का यही attitude हमेसा केंद्रीय सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की आँख में किरकिरी बना रहा है