शनिवार, 17 अप्रैल 2021

COVID 19

ऐसे अधिकारियों से सावधान रहना चाहिए जो कारोबारी बन चुके हों।ये कारोबारी अधिकारी 24x7 अपना कारोबार और अपनी कुर्सी बचाने की जुगत में रहते हैं।संकट के समय उनसे good and effective governance, की उमीद करना बेमानी है ।
ईमानदारी पारदर्शिता तो उनके शब्दकोश से कोसो दूर है ।उनकी एक मात्र कोशिस ग़लत तरीक़े से बनाए अपने हज़ारों करोड़ के आर्थिक साम्राज्य को बचाने की ही रहती है 
इसके लिए वे किसी से भी किसी भी हद तक नीचे गिरकर समझौता कर सकते हैं।
देश के अलग अलग राज्यों के हालात भयावह हैं ।सरकारी मशीनरी पूरी तरह विफल और लाचार दिखायी दे रही है।अवाम भगवान के भरोसे है ।
इस हालात से सत्ता के शीर्ष पर वैठे राज नेताओं को सबक़ लेनी चाहिए । प्रशासनिक टीम बनाते समय चाटुकार, corrupt , अयोग्य अधिकारियों के बजाय honest efficient transparent experienced अधिकारियों को वरीयता देनी चाहिए ।
तभी भविस्य में होने वाले ऐसे हालातों को रोका जा सकेगा ।
इस समय महामारी के इस दौर में हज़ारों साल  पहले European history के एक युग की याद ताज़ा हो गयी है ।एक दौर था जब चर्च की सत्ता सर्वोपरि थी ।योरोपीय समाज का जीवन चर्च के ही निर्देशों के तहत चलता था ।
चर्च की रोज़ मर्रा की ज़िंदगी में इतनी अधिक दखलंदजी थी की स्वर्ग और नर्क में जाने का फ़ैसला भी यही पर permit के ज़रिए हो जाता था ।
उस दौर के राजा को भी मरने से पहले अपने तथा अपने सहयोगियों के लिए पर्मिट के ज़रिए स्थान अरछित करवानी पड़ती थी ।राजा के मरने के साथ ही उनके सहयोगियों को भी उसके साथ जाना पड़ता था ।
बाद में चर्च की इस सत्ता के ख़िलाफ़ धार्मिक सुधार आंदोलन हुआ और जन आक्रोश के सामने चर्च को झुकना पड़ा ।आंदोलन से पहले उस समय के सलाहकार और कारिंदे आज ही की तरह राजा को ग़लत सलाह दिया करते थे ।
अब हम आज कल लोकतांत्रिक व्यवस्था के हिस्सा हैं । लेकिन कारिंदों और सलाहकारों की कार्य शैली कमोवेश उसी तरह है ।पहले उल्टा पलटा जनविरोधी सलाह देकर सत्ता के शीर्ष पर वैठे व्यक्ति को श्रीहीन बना देते हैं।
और बाद में इलेक्शन के परिणाम आने के पहले ही अपनी तैनाती मनचाही जगह पर करवाकर फ़ाइल अपने ही पास रखे रहते हैं ।
सत्ता बदलने के बाद नए सरकार में जोड़तोड़ में विफल रहने के बाद पहले से करवाई गयी तैनाती वाली जगह पर चले जाते हैं।
राज नेताओं को अपनी गलती का एहसास सत्ता से बेदख़ल होने के बाद होता है ।महामारी के वक्त भी यही नजारा देखने को मिल रहा है ।जनता बग़ैर बेड ऑक्सिजन ventilator मर रही है ।लेकिन इन कारोबारी अधिकारियों ने अपने लिए सबकूछ advance में reserve करवा लिया है ।वास्तव में यह कृत्य लोकशाही और मानवता के ख़िलाफ़ जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है ।

सोमवार, 12 अप्रैल 2021

judges re-employment

देश की अलग अलग अदालतों से retire होने के बाद विभिन्न सरकारों द्वारा judges साहबान को reemployment देने की परिपाटी रही है ।lower courts से लेकर supreme court तक के तमाम न्यायाधीशों को इस परिपाटी का लाभ मिलता रहा है ।
शर्त महज़ एक ही होती है की सरकार से उनके कितने मधुर रिश्ते रहे हैं ।इसी परम्परा के तहत उत्तर प्रदेश की सरकार ने 
अयोध्या बाबरी विध्वंस में एलके आडवाणी समेत 32 आरोपियों को बरी करने वाले पूर्व न्यायाधीश सुरेंद्र यादव को उप लोकायुक्त नियुक्त किया है ।

CBI court के पूर्व न्यायाधीश सुरेंद्र यादव अब करेप्शन की जांच करवाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।
इसके पहले supreme court के तमाम  retired judges ——रंग नाथ मिश्रा , वाई सी सब्बरवाल, k balakrishanan sadashivam और ranjan gogai सरीखे judges reemployment पा चुके हैं।
Allhabad high court और lucknow high कोर्ट के भी जस्टिस विष्णु सहाय और जस्टिस हैदेरअब्बास रजा आदि सरकारी मदद से re-employment पर रह चुके हैं।
देश के अलग अलग राज्यों में भी इसे मामलों की बहुतायत है ।
सवाल re-employment का नहि है ।सवाल है क्या ये महानुभाव नौकरी में रहते हुए अपने दायित्वों को  free and fair. Unbiased तरीक़े से निभाते रहे है?

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2021

scams

मायावती सरकार द्वारा लखनऊ और नॉएडा में बनवाए गए पार्कों के निर्माण में हुए कथित घोटाले के आरोप में up vigilence deptt की लखनऊ यूनिट ने आज कुछ junior अधिकारियों को गिरफ़्तार किया है ।
लेकिन सैकड़ों करोड़ के इस घोटाले में उस दौर के ज़्यादा तर ias अधिकारियों के विरुध अभी तक कोई करवाई नही हुई है ।
इनमे से कुछ तो आज भी महत्वपूर्ण पदों पर जमे हुए है । ऐसे अधिकारी अखिलेश सरकार में भी अपनी तैनाती कराने और खुद को बचाने में कामयाब रहे ।
पार्क घोटाले की जाँच उत्तर प्रदेश के लोक आयुक्त के आदेश पर shuरु हुई थी ।लखनऊ के गोमती नगर में fir भी दर्ज हुआ था ।लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ कारवाई की शुरुआत अब हुई है ।उमीद है की आगे चलकर घोटाले के ज़िम्मेद्दर शायद बड़े ias aur pcs अधिकारियों के ख़िलाफ़  भी कारवाई होगी

covid 19

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब इलाज के पर्याप्त इंतज़ाम कर दिए गए हैं 
देश के defence minister और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने अब लखनऊ निवासियों की जान बचाने का बीड़ा उठाया है
उनके प्रतिनिधि की तरफ़ से 9 april की रात्रि जारी एक हस्त लिखित बयान में दावा किया गया है की करोना मरीज़ों के इलाज की पूरी व्यवस्था कर ली गयी है ।आप लोगों की सुविधा के लिए हमने उनकी चिट्ठी भी नीचे paste कर दी है ।
राजनाथ सिंह जी का प्रयास सराहनीय है ।देश की सीमाओं के साथ ही लखनऊ की जनता की  चिंता उनके सांसद होने के दायित्व का एहसास कराता है ।
लेकिन अहम सवाल लखनऊ से निर्वाचित mlas और लखनऊ कोटे से राज्य मंत्रिमंडल में शामिल उन महानुभावों से भी है ।जितनी ज़िम्मेदारी राजनाथ जी की है उतनी ही ज़िम्मेदारी उनकी भी है ।
शायद वे लोग भी लखनऊ निवासियों की जान बचाने में जुटे होंगे ।

सोमवार, 22 मार्च 2021

Police

इलाहाबाद high कोर्ट के पूर्व जज a n mulla ने कई दशक पहले एक मामले की सुनवाई के वक्त police force को organised gang of criminals कहा था ।
Justice mulla के observation को बाद में भी पेश किया जाता रहा है । देश में जहां भी  police ज़्यादती की शिकायतें आती हैं तब अलग अलग अदालतें इस तरह की comments  करती रही हैं 
वावजूद इसके पुलिस की कार्य शैली में कोई ख़ास बदलाव नज़र नही आता ।पुलिस reform के नाम पर पूरे देश में हज़ारों करोड़ रुपया पानी की तरह भले ही बहाया जा चुका हो ।
वैसे तो फ़र्ज़ी मुठभेड़ दिखा कर हत्याएँ करने का शिलशिला पुराना है ।ats stf sit sog सरीखे पुलिस टीम के सदस्यों पर अपराधियों से पैसा लेकर एक दूसरे अपराधियों को मरने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं 
रुपए के दम पर थाने से लेकर ज़िलों तक में तैनाती के आरोप पुलिस विभाग के अधिकारी ही समय समय पर लगाते रहे हैं । लेकिन हंगामा तब होता है जब इसके पीछे कोई पोलिटिकल अजेंडा होता है ।
मुंबई के पुलिस commisioner पद से हटाए गए परमवीर सिंह ने maharastra के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर इसी तरह के गम्भीर आरोप लगाए हैं 
मामला supreme court से लेकर संसद तक में पहुँच चुका है । शरद पवार और उनकी पार्टी के नेता परमवीर सिंह के आरोपों को शीरे से ख़ारिज कर रहे हैं।आरोपों को राजनीति प्रेरित मानते हैं ।
परमवीर सिंह supreme court से मामले की जाँच cbi से करवाने की अपील किए हैं और भारतीय जनता पार्टी उधव सरकार से इस्तीफ़े की माँग कर रही है ।
इस घटना ने एकबार फिर पुलिसिया कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है ।परम वीर सिंह के लेटर से पूरे maharastra की राजनीति एक बार फिर गरम हो गयी है और भाजपा को इस आपदा में अवसर दिखायी दे रहा है ।

बुधवार, 17 मार्च 2021

worship places act

Supreme court में पिछले दिनो दो याचिकाएँ दाखिल हुई है 
एक याचिका के ज़रिए worship places act पर फिर से विचार करने और दूसरी याचिका के ज़रिए Holy Quran की कुछ आयतों को हटाने की अपील की गयी है 
ऐसी याचिकाओं पर विचार करने से पहले supreme कोर्ट को देश की मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए कोई फ़ैसला लेना चाहिए ।
देश इस समय internal aur external चुनौतियों से जूझ रहा है ।महंगाई बेरोज़गारी बदहाल आर्थिक हालात आम लोगों की ज़िंदगी बहाल किए हुए हैं ।
अदालतों में भी judges की कमी की वात supreme court के ही कई पूर्व judges कह चुके हैं । मुक़दमों की तादाद बड़ती जा रही है ।
ऐसे हालात में honourable supreme कोर्ट को अवाम से जुड़े मामलों पर विचार करना चाहिए ।ऐसी याचिकाएँ मज़हबी कम राजनैतिक ज़्यादा प्रतीत होती हैं।

सोमवार, 15 मार्च 2021

meghalya governor

किसान आंदोलन के समर्थन में मेघालय के राज्यपाल सत्य पाल मलिक का बयान क्या  unconstitutional conduct नहीं है ।
आख़िर उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया । क्या वे  आपदा में अवसर की तलास में हैं ।क्या वे राज्य पाल पद से त्याग पत्र देकर सक्रिय राजनीति में आने वाले हैं?
देश के किसान कृषि क़ानूनों को लेकर नाराज़ है ख़ास तौर पर west उ प हरियाणा और पंजाब में केंद्र सरकार और भाजपा के ख़िलाफ़ नाराज़गी है ।किसानो को मनाने में भाजपा पूरी तरह विफल रही है ।क्या अब सत्यपाल मलिक को आगे करके भाजपा किसानों को अपने पाले में लाना चाहती है ? 
रणनीति चाहे जो हो लेकिन एक बात तय है की राज्यपाल के पद पर रहते हुए सत्य पाल मलिक का आचरण मर्यादित नहीं है।